रोजगार के मोर्चे पर जेन जी की चिंता बढ़ी, 32% ने कहा नौकरियां हैं कम


भारत के युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती सिर्फ अपनी पसंद की नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है. बल्कि बड़ी संख्या में युवा पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध न होने को ही सबसे बड़ी समस्या मानते हैं. हाल ही में सामने आई अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के सर्वे में 32 फीसदी लोगों ने कहा कि युवाओं के सामने सबसे बड़ी रोजगार समस्या पर्याप्त नौकरियों का नहीं होना है. इसके बाद 18 प्रतिशत लोगों ने कम वेतन को बड़ी परेशानी बताया. सर्वे में 17-17 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नौकरियां उनकी योग्यता के अनुरूप नहीं है और सरकारी भर्ती धीमी है. वहीं 7 प्रतिशत लोगों के अनुसार शिक्षा युवाओं को नियोक्ताओं की जरूरत के अनुसार कौशल स्किल नहीं देती. सिर्फ चार प्रतिशत ने सुरक्षित नौकरी और सुविधाओं की कमी को सबसे बड़ी समस्या माना है. 

रोजगार क्षमता बढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी?

रोजगार और युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए. इस सवाल पर भी सर्वे में बताया गया है कि इसकी जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए. वहीं 63 प्रतिशत लोगों ने कहा युवाओं कि रोजगार क्षमता सुधारने के मुख्य जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारों की होनी चाहिए. इसके मुकाबले 14 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी स्कूल और यूनिवर्सिटी की भी हाेनी चाहिए. 9 प्रतिशत ने प्राइवेट कंपनी और 5 प्रतिशत ने व्यक्ति और परिवार को इसकी जिम्मेदारी दी. वहीं 10 प्रतिशत लोग ने सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया. 

देश में युवाओं की आबादी बढ़ी, लेकिन नौकरी तक पहुंच नहीं 

See also  IIT Madras and IIT Kanpur introduce a practice-oriented Bachelor of Cybersecurity for July 2026 session

भारत में 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 36.7 करोड़ लोग हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी है. बड़ी संख्या में युवा उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं और उनके बीच बेहतर करियर को लेकर उम्मीद भी बढ़ी है. हालांकि रोजगार के आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद स्थिर और अच्छी आय वाली नौकरी तक पहुंचना भी बड़ी समस्या है. अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार देश में ग्रेजुएट्स की संख्या जिस गति से बढ़ रही है, उस अनुपात में ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी नहीं बढ़ी. युवा ग्रेजुएट के बीच बेरोजगारी, स्थायी और बेहतर सैलरी वाली नौकरियों की पहुंच समस्या बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 से 2023-24 के बीच जो 8.3 करोड़ नौकरियां जुड़ीं, उनमें करीब 4 करोड़ नौकरियां कृषि क्षेत्र में थी. ऐसे में बेरोजगारी दर में कमी आने के बावजूद रोजगार की गुणवत्ता एक अलग चुनौती बनी हुई है. 

ये भी पढ़ें-राजस्थान में 76 हजार टीचर्स को घंटे के हिसाब से मिलेगी सैलरी, जानें कैसे होगी भर्ती

सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी दर घटी 

सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रोजगार की स्थिति में सुधार के आंकड़े सामने आए. इसके अनुसार 2017-18 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घट कर 3.2 प्रतिशत रह गई. इसी अवधि में महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 23 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हुई. वहीं चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 6 महीने में नेशनल करियर सर्विस के जरिए 2.3 करोड़ से ज्यादा रिक्तियों को भी उपलब्ध कराया गया. हालांकि सर्वे और रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि रोजगार की संख्या के साथ-साथ नौकरी का वेतन स्थायित्व और उम्मीदवार की योग्यता के अनुरूप काम मिलना भी जरूरी है. 

See also  Today News Headlines for School Assembly, June 17, 2026: UK bans social media under 16, Neeraj Chopra at Doha Diamond League

रोजगार से जुड़ी सरकारी योजनाओं पर जोर 

सरकारी की रोजगार नीति में रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन, स्किलिंग और औपचारिक के रोजगार को बढ़ावा देने पर छोड़ दिया गया है. रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन की योजना अब प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के रूप में लागू है. इस योजना के लिए  99,446 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और दो वर्ष में 3.5 करोड़ से ज्यादा रोजगार को समर्थन देने का टारगेट रखा गया है. इसमें करीब 1.92 करोड़ों ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जो पहली बार वर्कफोर्स में एंट्री करेंगे. पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को 15,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जा सकता है, जबकि एलिजिबल नियोक्ताओं को अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए हर महीने 3000 रुपये तक मिल सकते हैं.

ये भी पढ़ें-डाक विभाग में निकली 25 हजार से ज्यादा नौकरियां, 10वीं पास करें आवेदन

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required