रिसर्च में महिलाओं की हिस्सेदारी 29% बढ़ी, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में अब भी है सबसे पीछे


Women Researchers in India: भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में महिलाओं के भागीदारी पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सेक्टर के हिसाब से तस्वीर अभी भी एक जैसी नहीं है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की Research and Development Statistics at a Glance 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 2020-21 के 18.6 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में करीब 29 प्रतिशत हो गई है. हालांकि प्राइवेट इंडस्ट्री के आर एंड डी सेक्टर में महिला रिसर्चर की भागीदारी सिर्फ 17.8 प्रतिशत है, जो बाकी प्रमुख क्षेत्र के मुकाबले सबसे कम है.

देश में रिसर्चर्स में महिलाओं की भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2024 तक भारत में 5 लाख से ज्यादा फुल टाइम इक्विवेलेंट रिसर्चर्स थे. इनमें करीब 1.5 लाख महिला रिसर्चर्स शामिल थी. इस तरह कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत तक पहुंच गई है. महिला रिसर्चर्स की हिस्सेदारी में यह बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों में हुई है. 2020-21 में रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी 18.6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई. यानी इस अवधि में महिला रिसर्चर की हिस्सेदारी में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.

किस सेक्टर में कितनी महिला रिसर्चर्स

अलग-अलग क्षेत्रों में महिला रिसर्चर्स की भागीदारी देखें तो उच्च शिक्षा क्षेत्र में 36 प्रतिशत के साथ महिलाएं सबसे आगे हैं. वहीं इसके बाद राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य स्तर की आर एंड डी प्रयोगशालाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है. केंद्र सरकार की आर एंड डी लैब में महिला रिसर्चर्स की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र की इंडस्ट्री में 21.2 प्रतिशत है. प्राइवेट इंडस्ट्री में यह आंकड़ा सबसे कम 17.8 प्रतिशत है. इस तरह कुल रिसर्च वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद प्राइवेट आर एंड डी में उनकी मौजूदगी अभी भी दूसरे प्रमुख सेक्टर से पीछे बनी हुई है.

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रिसर्च प्रोजेक्ट की कमान संभाल रही महिलाएं

महिलाओं के भागीदारी सिर्फ रिसर्च टीम का हिस्सा बनने तक सीमित नहीं रही है. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि रिसर्च प्रोजेक्ट के नेतृत्व में भी उनकी मौजूदगी बढ़ी है. केंद्र सरकार के फंड से मिलने वाली एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च परियोजना में महिला प्रोजेक्ट हेड की हिस्सेदारी 2000-01 में 13 प्रतिशत थी. 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया.  पिछले 2 वर्षों में भी करीब 30 प्रतिशत प्रोजेक्ट लीडर महिलाएं रही है. इससे रिसर्च क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका में आए बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है, जहां वे अब परियोजनाओं के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाल रही है.

रिसर्च पर सरकार ने दिए 3,356 करोड़ रुपये

रिपोर्ट में देश में रिसर्च फंडिंग से जुड़े आंकड़े भी दिए गए हैं. साल 2023-24 में सरकार की ओर से समर्थित एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च के तहत 6094 परियोजनाओं के लिए 3,356 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई. इसका करीब तीन-चौथाई हिस्सा शैक्षणिक संस्थाओं को मिला. इस फंडिंग में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का योगदान आधे से ज्यादा रहा. वहीं देश के कुल आर एंड डी खर्चे में सरकार और प्राइवेट उद्योग की हिस्सेदारी भी काफी करीब है. हर 100  रुपये के आर एंड डी खर्चे में सरकार का योगदान करीब 48 रुपये और प्राइवेट इंडस्ट्री का करीब 45 रुपये है.

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