राम मंदिर दान मामले की जांच कर रही SIT कैसे बनी? जानिए किस आधार पर चुने जाते हैं अफसर


हाल ही में यूपी के अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर देश भर के लोगों की नजरें इसी पर हैं. इस मामले की तह तक जाने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया था. इस टीम ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट भी उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है. यह तीन सदस्यीय SIT राज्य सरकार ने 13 जून को गठित की थी. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर किसी हाई-प्रोफाइल मामले की जांच करने वाली SIT में अधिकारियों का चयन कैसे किया जाता है.

दरअसल, SIT कोई स्थायी जांच एजेंसी नहीं होती. इसे किसी खास मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार या फिर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर बनाया जाता है. जांच पूरी होने के बाद इस टीम का काम भी खुद ही खत्म हो जाती है.

कैसे चुने जाते हैं अफसर?

बताते चलें कि SIT में किसी नई भर्ती के जरिए अधिकारियों का चयन नहीं किया जाता है. इसमें पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत अनुभवी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाता है. जिन अधिकारियों का सेवा रिकॉर्ड अच्छा होता है, गंभीर मामलों की जांच का अनुभव होता है और जिनकी निष्पक्षता पर भरोसा होता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है. राम मंदिर दान मामले में बनाई गई SIT की कमान लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत को सौंपी गई. इस टीम में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

See also  UGC NET answer key 2026 when? How to download, raise objections

यह भी पढ़ें – यूपी के छात्रों की होगी बल्ले-बल्ले! स्कॉलरशिप से लेकर फ्री टैबलेट तक, जानें 8 बड़ी योजनाएं

कौन करता है फैसला?

अगर SIT का गठन राज्य सरकार करती है तो गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय वरिष्ठ अधिकारियों के नाम तय करते हैं. वहीं, यदि सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट किसी मामले में SIT बनाने का आदेश देता है तो अदालत यह भी तय कर सकती है कि टीम में कौन-कौन से अधिकारी होंगे या किस एजेंसी के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा.

क्या-क्या होती है जिम्मेदारी?

SIT को सामान्य जांच टीम की तुलना में अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं. टीम दस्तावेजों की जांच करती है, संबंधित लोगों से पूछताछ करती है, CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य जुटाती है. जरूरत पड़ने पर फॉरेंसिक और तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ली जाती है. राम मंदिर दान मामले में भी SIT ने ट्रस्ट के अधिकारियों और कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की. शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है, लेकिन जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट बाद में दी जाएगी.

यह भी पढ़ें – हिमाचल में TET को लेकर बड़ी अपडेट, हजारों शिक्षकों को मिला 2028 तक का समय

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

See also  CBSE Class 10 Second Board Result 2026 Live: Will CBSE Declare Results Today? Check the Latest Result Update

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required