देश में MBBS सीटें 1.36 लाख के पार, 778 लोगों पर एक डॉक्टर-लोकसभा में जेपी नड्डा ने जारी किए आंकड़े 


MBBS: देश में मेडिकल शिक्षा और डॉक्टरों की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों में एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन की मेडिकल सीटों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही देश का डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात भी बेहतर होकर 1:778 तक पहुंच गया है जो डब्ल्यूएचओ के एक डॉक्टर प्रति 1000 आबादी के मानक से बेहतर माना जाता है.

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सार्वजनिक किए आंकड़े 

लोकसभा में लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि शैक्षणिक स्तर 2023-24 में एमबीबीएस की 1,09,115 सीटें थी, जो 2025-26 में बढ़कर 1,28, 976 हो गई. इसी अवधि में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 तक पहुंच गई है. यह आंकड़े नेशनल मेडिकल कमीशन के रिकॉर्ड पर आधारित है. सरकार के अनुसार मेडिकल शिक्षा के विस्तार का उद्देश्य देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है. खास तौर पर दूर दराज और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नए मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ने से भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता बेहतर होगी. 

778 लोगों पर एक डॉक्टर 

सरकार ने लोकसभा में यह भी बताया कि भारत का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात अब 1:778 हो गया है. भारतीय चिकित्सा रजिस्टर के अनुसार देश में  15,35,155 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर है. इसके अलावा आयुष प्रणाली के तहत 7,51,768 रजिस्टर्ड चिकित्सक भी मौजूद हैं. दोनों प्रणालियों के कुल 22,86,923 रजिस्टर्ड डॉक्टर में से अगर 80 प्रतिशत को एक्टिव सेवा में उपलब्ध माना जाए तो देश का डॉक्टर जनसंख्या अनुपात 1:778 बैठता है. सरकार का कहना है कि यह अनुपात विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से बेहतर है. 

See also  He studied mechanical engineering, worked at Toyota and Volvo, then built a solution transforming farmers’ lives forever

2026-27 में फिर बढ़ी एमबीबीएस सीटें 

इसी बीच नेशनल मेडिकल काउंसिल ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए राज्यवार एमबीबीएस सीट मैट्रिक्स भी जारी किया था. नए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 9,911 नई एमबीबीएस सीटों को मंजूरी दी गई, जिन्हें पहले से नवीनीकृत 1,27,028 सीटों के साथ जोड़ने पर कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या 1,36,939 हो गई है.यह सीटें देश भर के 823 मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध होगी. हालांकि इस लिस्ट में राष्ट्रीय महत्व के संस्थान शामिल नहीं है. वहीं सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और सीटों में लगातार वृद्धि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. नए मेडिकल कॉलेज के जरिए विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके. 

ये भी पढ़ें-5 साल में दोगुनी हुई NTA की इनकम, एग्जाम से कमाए 1100 करोड़ से ज्यादा 

2014 के बाद तेजी से बढ़ा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी लोकसभा में बताया कि 2014 से अब तक देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या अच्छा इजाफा हुआ है. अवधि में एमबीबीएस सीटें लगभग 51 हजार से बढ़कर 1 लाख 39 हजार से ज्यादा यूजी मेडिकल सीटें और पीजी मेडिकल सीटें 31 से बढ़कर 86 हजार के पार तक पहुंच गई है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम को भी शामिल किया गया है. इसके तहत मेडिकल कॉलेज गांव को अपनाते हैं और एमबीबीएस छात्र उन गांव के परिवारों के साथ जुड़कर सामुदायिक चिकित्सा का अनुभव प्राप्त करते हैं.

See also  'Refrain from visiting gatherings at Jantar Mantar...', JNU issues advisory for students

ये भी पढ़ें-NEET विवाद के बाद NTA में बड़ा फेरबदल, जानें सरकार इसमें कैसे दे सकती है दखल और कया है कानूनी स्थिति?

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required