देश में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या घटी, एक साल में 3282 स्कूल हुए कम 


Single Teacher School Ratio: देश में अकेले एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूलों की संख्या में कमी आई है. यूडीआईएसई+ के आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में देश में 1,04,125 सिंगल टीचर स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 1,00,843 रह गए. यानी 1 साल में ऐसे स्कूलों की संख्या में कुल दो 3,282 की कमी दर्ज की गई है. यह आंकड़े केंद्र सरकार के आधिकारिक स्कूल शिक्षा डेटाबेस से सामने आए है. वहीं आपको बता दें कि सिंगल टीचर स्कूल ऐसे हो स्कूल होते हैं, जहां सभी कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी एक ही शिक्षक पर होती है. 

पांच राज्यों में 11 हजार से ज्यादा स्कूल हुए कम

आंकड़ों के अनुसार पांच राज्यों में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में कुल 11 हजार से ज्यादा की कमी आई है. यह संख्या देश में दर्ज हुई 3,282 की शुद्ध कमी से तीन गुना से भी ज्यादा है. इसका मतलब है कि कुछ राज्यों में बड़ी गिरावट के साथ-साथ दूसरे राज्यों में हुई बढ़ोतरी ने राष्ट्रीय आंकड़े को प्रभावित किया है. 

मध्य प्रदेश में सबसे बड़ी गिरावट 

मध्य प्रदेश में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई है. राज्य में 2024-25 में ऐसे 7,217 स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 2,269 रह गए. यानी 1 साल में 4,948 किलो की कमी हुई. उसके बाद छत्तीसगढ़ का नंबर है. यहां सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या 5,973 से घटकर 2,461 रह गई. इस तरह राज्य में 3,512 स्कूल कम हुए. उत्तर प्रदेश में भी ऐसे स्कूलों की संख्या में कमी आई है. 2024-25 में यूपी में 9,508 सिंगल टीचर स्कूल थे, जो 2025-26 में 7,874 रह गए. यानी यहां 1,634 स्कूल कम हुए. हालांकि प्रमुख राज्यों में अभी भी उत्तर प्रदेश में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या सबसे ज्यादा है. पंजाब में ऐसे स्कूलों की संख्या 682 और गुजरात में 601 कम हुई है. 

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आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा बढ़े सिंगल टीचर स्कूल 

जहां कई राज्यों में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या घटी है. वहीं कुछ राज्यों में इसका उल्टा रुझान देखने को मिला. आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई. यहां ऐसे स्कूलों की संख्या 2024-25 के 12,912 से बढ़कर 2025-26 में 16,357 हो गई. यानी 1 साल में 3,445 स्कूल बढ़े. महाराष्ट्र में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में 1,117 और राजस्थान में 1,083 की बढ़ोतरी हुई. वहीं कर्नाटक में 693 और झारखंड में 655 ऐसे स्कूल बढ़े. 

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सरकार ने शिक्षक व्यवस्था को लेकर क्या कहा?

राज्य सभा में केंद्र सरकार ने शिक्षक पदों में कमी या रिक्तियों के लिए कई सामान्य कारण बताए हैं. इनमें शिक्षकों का रिटायरमेंट, इस्तीफा, नए पदों का सृजन, शिक्षकों की नियुक्ति और छात्रों की संख्या में बदलाव जैसे करण शामिल है. हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन राज्यों में सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या तेजी से घटी या बढ़ी वहां इन कारणों में से किसका कितना प्रभाव रहा. 

स्कूल कम हुए, लेकिन वजह पूरी तरह साफ नहीं 

एक्सपर्ट्स के अनुसार सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या में कमी को पहली नजर में सकारात्मक बदलाव माना जा सकता है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं होता है कि स्कूलों में कमी नए शिक्षकों की नियुक्ति के कारण हुई या स्कूलों के विलय, बंद होने या उनके वर्गीकरण में बदलाव की वजह से. यानी केवल सिंगल टीचर स्कूलों की संख्या घटने के आधार पर शिक्षक उपलब्धता में सुधार का पूरा आकलन करना संभव नहीं है. 

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छात्र शिक्षक अनुपात में भी दिखा सुधार 

यूडीआईएसई के आंकड़ों के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात यानी Pupil-Teacher Ratio को लेकर भी तस्वीर सामने आई है. 2024-25 में देश का समग्र पीटीआर 24 छात्र प्रति शिक्षक बताया गया है. वहीं 2025-26 के आंकड़ों में इससे शिक्षा के अलग-अलग स्तरों के हिसाब से बताया गया है. प्राथमिक स्तर पर पीटीआर 19, उच्च प्राथमिक में 17, माध्यमिक में 15 और उच्च माध्यमिक में 23 रहा.

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