थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर CBSE का बड़ा फैसला, तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी बोर्ड परीक्षा


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • CBSE ने त्रिभाषा नीति पर दिशा-निर्देश जारी कर भ्रम दूर किया.
  • वर्तमान 10वीं, 9वीं के छात्रों पर बड़े बदलाव तत्काल लागू नहीं.
  • नीति चरणबद्ध लागू, 6वीं के बैच से दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य.
  • 7वीं, 8वीं, 9वीं के लिए तीसरी भाषा स्कूल स्तर पर मूल्यांकन.

CBSE के थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला को लेकर छात्रों और उनके पेरेंट्स के मन में कई सवाल थे. इन्हे अब सीबीएसई ने दूर कर दिया है. बोर्ड की तरफ से कहा गया है कि 7वीं, 8वीं, 9वीं और मौजूदा 10वीं के छात्रों के लिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा. बोर्ड ने नई भाषा नीति को लेकर डिटेल्स में दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं.

CBSE बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन्स के अनुसार मौजूदा 10वीं क्लास के छात्रों पर भी नई भाषा नीति लागू नहीं होगी. इससे इस साल बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को किसी तरह के बदलाव या अतिरिक्त विषय की चिंता करने की जरूरत नहीं है. सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे. हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा (भारतीय भाषा/भाषा) भी पढ़नी होगी.

इस तरह किया जाएगा लागू
सीबीएसई का कहना है कि नई भाषा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. इससे छात्रों की पढ़ाई पर अचानक कोई असर न पड़े. इसके लिए कक्षा के स्तर के अनुसार आवश्यक अध्ययन सामग्री भी तय समय सीमा के अंदर दी जाएगी.

See also  Indian Air Force Launches GATE-Based Entry For Technical Officers, Exempt From AFCAT | Education and Career News

किस कक्षा पर क्या नियम लागू होंगे?

  • कक्षा 10 (सत्र 2026-27)

इस बैच के लिए कोई बदलाव नहीं होगा. छात्र पहले की तरह केवल दो भाषाएं ही पढ़ेंगे. उन्हें तीसरी भाषा लेने की जरूरत नहीं होगी.

  • कक्षा 9 (सत्र 2026-27)

इस बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. तीन में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है. अगर कोई छात्र पहले से हिंदी और तमिल जैसी दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है.

यदि कोई छात्र तमिल और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी. अगर कोई छात्र अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहा है, तो उसे एक बार की विशेष छूट दी गई है. वह अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रख सकता है, लेकिन इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी.

सबसे बड़ी राहत

मौजूदा समय में कक्षा 9 के छात्रों को तीसरी भाषा में CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. इस भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल के स्तर पर होगा.

  • कक्षा 7 और 8 (सत्र 2026-27)

जब ये छात्र कक्षा 9 और 10 में पहुंचेंगे, तब भी तीन भाषाएं पढ़ेंगे. अगर उन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुन रखी हैं, तो उन्हें केवल एक भारतीय भाषा और जोड़नी होगी. इन छात्रों को भी तीसरी भाषा की CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी. इसका मूल्यांकन केवल स्कूल करेगा.

  • कक्षा 6 (सत्र 2026-27) और उसके बाद के बैच

इन छात्रों पर नई नीति पूरी तरह लागू होगी. तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी. जब ये छात्र कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देंगे. NCERT 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में नई किताबें उपलब्ध करा रहा है.

See also  NEET UG 2026 fee refund link yet to get activated at neet.nta.nic.in; know how to apply

यह भी पढ़ें – Indian Air Force Recruitment: 10वीं पास के लिए IAF में निकली भर्ती, मल्टी टास्किंग स्टाफ पदों के लिए मांगे गए आवेदन

किन छात्रों को छूट मिलेगी?

CBSE ने कुछ श्रेणियों के छात्रों को इस नियम से छूट दी है. दिव्यांग (CwSN) छात्रों को कानून के अनुसार राहत मिलेगी. भारत से बाहर स्थित CBSE स्कूलों के छात्रों के लिए भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा. विदेश से भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को भी तीसरी भारतीय भाषा से छूट मिलेगी.

अगर परिवार दूसरे राज्य में चला जाए तो?

अगर किसी छात्र के माता-पिता दूसरे राज्य में स्थानांतरित हो जाते हैं, तो छात्र अपनी पहले चुनी गई तीसरी भाषा जारी रख सकता है. ऐसे मामलों में स्कूल को पढ़ाई की व्यवस्था करनी होगी.

स्कूलों में शिक्षक कैसे उपलब्ध होंगे?

CBSE ने कहा है कि स्कूल जरूरत पड़ने पर मौजूदा शिक्षकों, सेवानिवृत्त (Retired) शिक्षकों, पोस्टग्रेजुएट शिक्षकों और ऑनलाइन या हाइब्रिड माध्यम का इस्तेमाल कर सकते हैं.

CBSE ने क्या कहा?

बोर्ड का कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप किया जा रहा है. इसका मकसद छात्रों पर परीक्षा का बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और भाषा सीखने को आसान, रोचक और उपयोगी बनाना है. साथ ही बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव से किसी भी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

यह भी पढ़ें  – CBSE की पोल खोलने वाले 12वीं के स्टूडेंट सार्थक सिद्धांत ने लॉन्च किया पोर्टल, 1.66 करोड़ सरकारी रिकॉर्ड किए सार्वजनिक

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

See also  CBSE Class 10 Second Board Result 2026 Live: CBSE 10th Phase II Results Expected Soon, Official Websites To Check



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required