आदिवासी छात्रों ने रचा इतिहास, 48 बच्चों का देश के बड़े पर्यटन संस्थान में चयन


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  • अभिभावकों की काउंसलिंग और विशेष प्रशिक्षण से मिली सफलता.

पहाड़ों और जंगलों के बीच बसे छोटे-छोटे गांवों से निकलकर अब आदिवासी छात्र देश के बड़े शिक्षण संस्थानों तक पहुंच रहे हैं. तमिलनाडु से आई एक प्रेरणादायक खबर ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो कोई भी सपना दूर नहीं होता. इस साल तमिलनाडु के आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों के 48 छात्रों ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है.

इन छात्रों ने भारत के टॉप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (IITTM) की प्रवेश परीक्षा पास कर दाखिला हासिल किया है. खास बात यह है कि इनमें 18 छात्राएं भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र इस संस्थान तक पहुंचने में सफल हुए हैं.

अक्सर यह माना जाता है कि बड़े शहरों के बच्चों को ही बेहतर अवसर मिलते हैं, लेकिन तमिलनाडु के आदिवासी छात्रों ने इस सोच को बदल दिया है. सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने मेहनत और लगन के दम पर वह कर दिखाया, जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी मुश्किल थी. पिछले साल सिर्फ 11 आदिवासी छात्रों का चयन हुआ था, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़कर 48 तक पहुंच गई.

क्या है IITTM, जहां मिला दाखिला?

IITTM देश के सबसे प्रमुख पर्यटन और ट्रैवल मैनेजमेंट संस्थानों में से एक माना जाता है. यह संस्थान केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के तहत काम करता है और यहां पर्यटन, ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और डेस्टिनेशन मैनेजमेंट जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है.

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चयनित छात्र उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित कैंपस में तीन साल का बीबीए इन टूरिज्म एंड ट्रैवल कोर्स करेंगे. सबसे राहत की बात यह है कि इन छात्रों की पढ़ाई का पूरा खर्च तमिलनाडु सरकार उठाएगी. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी उच्च शिक्षा का मौका मिलेगा.

माता-पिता की चिंता बनी सबसे बड़ी चुनौती

अधिकारियों के अनुसार, आदिवासी इलाकों से बच्चों को देश के बड़े संस्थानों तक भेजने में सबसे बड़ी चुनौती माता-पिता की चिंता होती है. कई अभिभावक अपने बच्चों को घर और गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर पढ़ने भेजने में झिझक महसूस करते हैं. उन्हें बच्चों की सुरक्षा, रहने की व्यवस्था और नए माहौल की चिंता रहती है. यही वजह है कि कई प्रतिभाशाली छात्र अवसर मिलने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाते.

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समझाइश और काउंसलिंग ने बदली तस्वीर

इस समस्या को दूर करने के लिए आदिवासी कल्याण विभाग ने खास पहल की. विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में माता-पिता के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए. इन बैठकों में उन्हें बताया गया कि पर्यटन और ट्रैवल सेक्टर में कितने बड़े करियर अवसर मौजूद हैं.साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया कि बच्चों को पढ़ाई के दौरान हर तरह की सहायता दी जाएगी. अधिकारियों और शिक्षकों की इस कोशिश का असर देखने को मिला और बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को आगे बढ़ने की अनुमति दी.

छात्रों को दी गई खास ट्रेनिंग

सिर्फ परीक्षा पास कराना ही लक्ष्य नहीं था. विभाग ने छात्रों को प्रतियोगिता के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने का भी फैसला किया. इसके लिए कांचीपुरम के कुमिझी स्थित एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल हायर सेकेंडरी स्कूल में विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया गया.इस शिविर में छात्रों को अंग्रेजी बोलने, इंटरव्यू देने, ग्रुप डिस्कशन में हिस्सा लेने और आत्मविश्वास बढ़ाने की ट्रेनिंग दी गई. विशेषज्ञों ने उन्हें समझाया कि बड़े संस्थानों में चयन के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास भी जरूरी होता है.

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