क्या साइबर अटैक से लीक होंगे छात्रों के नाम-पते, फोन नंबर और आधार डिटेल्स, जानें कितना खतरा?


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  • सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर पेमेंट सिस्टम में गड़बड़ी हुई.
  • कुछ छात्रों को फीस कम, कुछ को ज्यादा दिखी.
  • छात्रों के डेटा लीक होने की पुष्टि अभी नहीं हुई.
  • तकनीकी खराबी या साइबर अटैक की जांच जारी है.

हाल ही में CBSE के रीइवैल्यूएशन पोर्टल पर उस समय समस्या सामने आई जब पेमेंट सिस्टम में अचानक असामान्य गतिविधियां दर्ज की गईं. कुछ छात्रों को फीस बेहद कम दिखाई दी, तो कुछ को बहुत ज्यादा रकम दिखने लगी.इस घटना के बाद सिस्टम की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए.

क्या छात्रों का डेटा खतरे में है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस घटना से छात्रों का निजी डेटा जैसे नाम, पता, फोन नंबर और आधार नंबर लीक हो सकता है.विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल ऐसी कोई पुष्टि नहीं है कि किसी भी छात्र का व्यक्तिगत डेटा बाहर गया हो.जो समस्या सामने आई है, वह मुख्य रूप से पेमेंट गेटवे और फीस डिस्प्ले सिस्टम से जुड़ी बताई जा रही है.

साइबर एक्सपर्ट से बातचीत में सामने आई अहम बात

ABP Live से बातचीत में साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा ने बताया कि अगर किसी वेबसाइट में “लूपहोल्स” यानी सुरक्षा की कमजोरियां रह जाती हैं, तो डेटा लीक का खतरा हमेशा बना रहता है.लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार डेटा चोरी हो ही जाता है. अगर सिस्टम को समय-समय पर अपडेट और सिक्योरिटी ऑडिट किया जाता है, तो बड़ा खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.

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कितनी बार होती है सुरक्षा जांच?
जानकारी के अनुसार, सरकारी और बड़े डिजिटल पोर्टल्स की साइबर सुरक्षा जांच आमतौर पर हर 6 महीने में की जाती है. इस जांच में सिस्टम की कमजोरियों को ढूंढकर उन्हें ठीक किया जाता है ताकि किसी भी तरह के साइबर अटैक को रोका जा सके.

CERT-In की भूमिका क्या है?
भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (CERT-In) ऐसे मामलों में अलर्ट और गाइडेंस जारी करती है. यह एजेंसी साइबर अटैक, डेटा लीक और सिस्टम की कमजोरियों पर नजर रखती है और जरूरी दिशा-निर्देश देती है.

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कितना बड़ा है असली खतरा?
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि डेटा लीक का खतरा तभी गंभीर होता है जब पूरा डेटाबेस या सर्वर हैक हो जाए.फिलहाल जो संकेत मिले हैं, वे सिर्फ पेमेंट सिस्टम और ट्रांजेक्शन लेवल की गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं.इसलिए अभी इसे “डेटा लीक” कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन पूरी तरह से जोखिम को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.

कितने छात्र प्रभावित हुए?
अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक करीब 50 छात्रों के अकाउंट में फीस राशि गलत दिखाई दी.किसी को बहुत कम और किसी को बहुत ज्यादा रकम दिखी, जिससे सिस्टम में तकनीकी अस्थिरता साफ नजर आई.

CBSE और तकनीकी टीमें मिलकर पूरे सिस्टम की जांच कर रही हैं.IIT विशेषज्ञों की टीम भी इस मामले में शामिल है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह तकनीकी खराबी थी या कोई साइबर अटैक.इसके अलावा सिस्टम को और मजबूत करने और सुरक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया भी जारी है.

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