रिक्शा चालक के बेटे ने पहले प्रयास में पास की UPSC परीक्षा, बने IAS अधिकारी


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  • 22 साल की उम्र में पहली बार में IAS बने.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से निकलकर गोविंद जायसवाल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के सामने गरीबी भी हार मान लेती है.रिक्शा चलाकर परिवार पालने वाले पिता के बेटे ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर लिया.आज उनकी कहानी लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है.

गोविंद जायसवाल का जन्म वाराणसी के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था. उनका परिवार रेलवे स्टेशन के पास एक छोटे से कमरे में रहता था। घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार लंबे समय तक बिजली नहीं रहती थी. बचपन में ही मां का निधन हो जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके पिता पर आ गई.

बचपन के अपमान ने बदल दी जिंदगी

गोविंद को कई बार गरीबी की वजह से लोगों के ताने और भेदभाव का सामना करना पड़ा. एक घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, जब उन्हें एक अमीर दोस्त के घर से केवल गरीब होने की वजह से बाहर निकाल दिया गया.उसी दिन उन्होंने IAS अधिकारी बनने का फैसला कर लिया.

बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने बेच दिए रिक्शे

गोविंद के पिता रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे.बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जमीन और कई रिक्शे तक बेच दिए ताकि गोविंद दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी कर सकें.पिता का यह त्याग गोविंद की सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना.

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दिल्ली पहुंचने के बाद गोविंद ने आर्थिक तंगी के बावजूद हार नहीं मानी. उन्होंने बच्चों को गणित पढ़ाकर अपना खर्च निकाला और लाइब्रेरी में घंटों बैठकर पढ़ाई की.उन्होंने हिंदी माध्यम से UPSC की तैयारी जारी रखी और अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया.

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पहले ही प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

साल 2006 में केवल 22 साल की उम्र में गोविंद जायसवाल ने UPSC परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास कर ली.उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 48 हासिल की और IAS अधिकारी बने. उनकी सफलता ने यह साबित किया कि सफलता के लिए मजबूत इरादे और मेहनत सबसे ज्यादा जरूरी हैं.

गोविंद जायसवाल का मानना है कि भाषा कभी भी सफलता में रुकावट नहीं बनती. उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और अपने विचारों को सही तरीके से व्यक्त करने की क्षमता ही असली ताकत होती है. हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की.

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