कौन-कौन सी किताब लिख चुका उमर खालिद, क्या है इसका सब्जेक्ट?


जेएनयू के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद एक बार फिर चर्चा में है. पुणे स्थित केंद्र सरकार की लाइब्रेरी में उमर खालिद की पीएचडी रिसर्च आधारित किताब फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया. सोशल मीडिया पर यह विवाद सामने आने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) लाइब्रेरी की ओर से इस किताब को हटा दिया गया है. दिल्ली दंगों के आरोपों के मामले में जेल की सजा काट रहे उमर खालिद ने यह किताब 2018 में झारखंड के सिंहभूम इलाके की आदिवासी जनजातियों के इतिहास पर अपनी पीएचडी थीसिस जेएनयू में सबमिट की थी.  जुलाई 2018 में जेएनयू के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज में जमा किए गए इस पीएचडी थीसिस ने कई लोगों का ध्यान अपनी और खींचा था. अब यही रिसर्च पहली बार फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर नाम से किताब के रूप में प्रकाशित हुआ है, जिसे लेकर पुणे स्थित केंद्र सरकार की लाइब्रेरी का विवाद सामने आया है. 

सोशल मीडिया पर आपत्तियां के बाद हुई जांच 

सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई जाने के बाद IISER पुणे लाइब्रेरी में उमर खालिद की किताब की मौजूदगी जांच के दायरे में आ गई. बाद में खबर आई कि इसे कलेक्शन से हटा दिया गया.  रिपोर्ट के अनुसार उमर खालिद की किताब को कलेक्शन से हटाने का यह फैसला किसी फॉर्मल रिव्यू एडमिनिस्ट्रेटिव निर्देश के बाद लिया गया था. उमर खालिद की और भी कई किताबों का जिक्र सोशल मीडिया पर जरूर मिलता है लेकिन ये किताबें उमर खालिद ने ही लिखी है इसकी कोई पुष्टि नहीं है. कई धार्मिक किताबों से भी उमर खालिद का नाम जोड़ा जाता है लेकिन जानकार कहते हैं कि यह एक गलतफहमी है और कुछ नहीं.

क्या है उमर खालिद की किताब फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज?

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उमर खालिद की इस किताब का मुख्य विषय झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में ब्रिटिश शासन काल के दौरान आदिवासी समाज का इतिहास और उनका सामाजिक, राजनीतिक ढांचा है. यह किताब ब्रिटिश काल के एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम और आदिवासी समाज को बनाने वाले पाव रिलेशन को दिखाती है और इन्हें इलाके के बड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ में दिखाती है. यह काम खालिद की डॉक्टरेट थीसिस पर आधारित है, जिसे उन्होंने जमा किया था. इस थीसिस के जमा करने के बाद उमर खालिद को 2019 में पीएचडी की डिग्री मिली थी. 

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JNU में लिखें फ्री उमर खालिद के नारे

उमर खालिद को लेकर एक और विवाद सामने आया है. दरअसल जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की दीवारों पर लिखे नारों को लेकर यह विवाद सामने आया है. शनिवार को जेएनयू के परिसर में फ्री उमर खालिद के नारे लिखे गए थे. इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले पर जांच की. इन नारों को लेकर जेएनयू प्रशासन का कहना है कि यूनिवर्सिटी की शांति भंग करने वाली इन हरकतों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इससे पहले जामिया में चल रहे विवाद में भी फ्री कश्मीर जैसे नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. 

2020 से जेल में है उमर खालिद

उमर खालिद जेएनयू के पूर्व रिसर्च स्कॉलर है. वहीं उमर खालिद 2020 से ही दिल्ली दंगों में बड़ी साजिश के आरोप के मामले में जेल में है. उमर खालिद पर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप लगाए गए हैं. आपको बता दें कि उमर खालिद जिन दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में जेल में है, उन दिल्ली दंगों में लगभग 53 लोगों की मौत हुई थी.

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