बच्चे को स्कूल में एडमिशन दिलाने की क्या है सही उम्र? जानें नियम


नए माता-पिता के मन में बच्चे की पढ़ाई को लेकर एक सवाल जरूर आता है कि उसे स्कूल में किस उम्र में एडमिशन दिलाना सही रहेगा. कई परिवार बच्चे को बहुत छोटी उम्र में स्कूल भेज देते हैं, जबकि कुछ माता-पिता 5 या 6 साल की उम्र तक इंतजार करते हैं. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि स्कूल एडमिशन को लेकर उम्र का क्या नियम है और बच्चे को किस कक्षा में किस उम्र में एडमिशन दिलाना सही होता है.

कक्षा 1 में कितनी होनी चाहिए उम्र?

नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के बाद बच्चों की शुरुआती शिक्षा को लेकर उम्र और कक्षाओं की व्यवस्था में बदलाव पर जोर दिया गया है. इसके तहत 5+3+3+4 वाली स्कूली शिक्षा व्यवस्था अपनाई गई है. इसमें शुरुआती पांच साल फाउंडेशनल स्टेज के होते हैं. कक्षा 1 में बच्चे के एडमिशन की उम्र को लेकर केंद्र स्तर पर 6 साल की उम्र को महत्व दिया गया है. CBSE के अनुसार कक्षा 1 में प्रवेश की उम्र राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नियमों के अनुसार तय हो सकती है. इसलिए एडमिशन से पहले स्कूल और अपने राज्य के मौजूदा नियमों को जरूर देखना चाहिए.

प्री-स्कूल में कब कराएं एडमिशन?

बच्चे की शुरुआती पढ़ाई आमतौर पर प्री-स्कूल से शुरू होती है. CBSE ने अपने स्कूलों के लिए प्री-स्कूल के पहले वर्ष में 3 साल से कम उम्र के बच्चे को प्रवेश नहीं देने का निर्देश दिया है. इसका मतलब यह है कि करीब 3 साल की उम्र से बच्चे की शुरुआती स्कूली शिक्षा शुरू हो सकती है. इसके बाद उम्र और स्कूल के नियम के अनुसार प्री-स्कूल के अलग-अलग स्तर और फिर कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाता है.

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3 से 6 साल की उम्र क्यों जरूरी है?

3 से 6 साल की उम्र बच्चे के मानसिक, सामाजिक और भाषा विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दौरान बच्चों को सिर्फ किताबों का नोलेज देने के बजाय खेल, एक्टिविटी और बातचीत के जरीए सीखने पर जोर दिया जाता है. NEP 2020 के तहत फाउंडेशनल स्टेज में बच्चों की शुरुआती शिक्षा को इसी तरह एक्टिविटी के माध्यम से और उम्र के हिसाब से बनाने पर जोर दिया गया है. इसलिए बच्चे को सिर्फ जल्दी स्कूल भेजना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि वह स्कूल के माहौल के लिए तैयार है या नहीं.

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