देश में कितने बच्चे करते हैं ऑनलाइन कोचिंग? PM की घोषणा के बीच जानें आंकड़े


Free Online Coaching: आज 15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. हर साल की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण किया. इस दौरान लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के लिए एक बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि सरकार अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बच्चों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देगी. इस घोषणा के बाद हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर देश में कितने बच्चे कोचिंग लेते हैं और ऑनलाइन पढ़ाई का चलन कितना बढ़ चुका है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी…

पीएम मोदी की आज की बड़ी घोषणा

आज सुबह लाल किले से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि युवा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं. उन्होंने कहा, “युवाओं के लिए हमने अलग-अलग परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने का फैसला किया है.” इस योजना का मकसद यह है कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चे भी बिना ज्यादा पैसे खर्च किए अच्छी तैयारी कर सकें. पीएम ने यह भी कहा कि इससे परिवारों के हजारों रुपये बचेंगे, क्योंकि आजकल परिवार स्कूल की पढ़ाई-लिखाई के अलावा कोचिंग पर भी पैसे खर्च कर देते हैं. पीएम ने अपने पूरे भाषण में विकसित भारत 2047 के सपने को दोहराते हुए कहा कि देश को आगे बढ़ाने में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी.

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कितने बच्चे लेते हैं कोचिंग? सरकारी आंकड़े

शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में यह सामने आया है कि देश के करीब 27 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट कोचिंग लेते हैं. बता दें कि यह सर्वे देशभर के 52,085 परिवारों और 57,742 छात्रों पर किया गया था. इस सर्वे में एक और बात सामने आई है कि ऑनलाइन कोचिंग का चलन शहरों में ज्यादा है. आकंड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले अभिभावक 30.7 प्रतिशत बच्चों की कोचिंग में पैसे लगाते हैं, जबकि गांवों में यह आंकड़ा करीब 25.5 प्रतिशत है.

कोचिंग पर हो रहा इतना खर्च 

आंकड़ों के मुताबिक, जहां पर परिवार अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए शहर में कोचिंग की फीस पर करीब औसतन 3,988 रुपये खर्च करते हैं, वहीं गांवों में यह खर्च करीब 1,793 रुपये है. हालांकि, पीएम मोदी केइस ऐलान के बाद देश भर में मुफ्त कोचिंग मिलेगी, जिसका सीधा फायदा उन बच्चों को मिलेगा जो पैसे की कमी की वजह से अच्छी कोचिंग नहीं ले पा रहे हैं. खासकर छोटे शहरों और गांवों के बच्चे, जिनका सपना बड़े कोचिंग संस्थानों में पढ़ने का है और वे वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, लेकिन अब घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से पढ़ाई कर सकेंगे.

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