Jhalawar School Flood Rescue | Students Rescued From Manoharthana School


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40 मिनट पहले

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झालावाड़ के एक गांव में बने सरकारी स्कूल में रोजाना की तरह कक्षाएं चल रही थीं। तब ही पास बहने वाले बरसाती नाले में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। कुछ ही देर में नाले का गंदा और तेज पानी स्कूल परिसर में घुसने लगा। देखते ही देखते पूरा स्कूल पानी से घिर गया और अंदर मौजूद बच्चों में चीख-पुकार मच गई। यह घटना झालावाड़ के मनोहरथाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टोडरी मीरा के झिकनी गांव की है।

गांव वासियों की मदद से तकरीबन 80 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। ये हालात तेज बारिश के बीच बच्चों को स्कूल से समय पर नहीं छोड़ने के चलते बने।

टीचर्स और गांव वालों ने बच्चों को घर पहुंचाया

बच्चों को सुरक्षित स्कूल ने निकालने के लिए स्कूल के 7 टीचर्स और ग्रामीणों ने साहस दिखाया और उन्हें बाहर निकाला। टीचर्स और गांव वालों की मदद से सभी बच्चों को उनके घर पहुंचाया गया। वहीं, नाले के तेज बहाव की चपेट में आने से स्कूल की करीब 50 फीट लंबी बाउंड्री टूट गई।

चेन बनाकर तेज बहते पानी से निकाले बच्चे

इस रेस्क्यू के दौरान पानी का बहाव इतना तेज था कि बच्चों को अकेले बाहर निकालना खतरनाक था। इसलिए शिक्षकों और गांव वालों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर लोगों की चेन बनाई। इसी के सहारे बच्चों को एक-एक करके तेज बहते पानी से बाहर निकाला गया।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी

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इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर नाराजगी जताई। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा – ‘ये कोई झरना नहीं, झालावाड़ के सरकारी स्कूल की तस्वीर है। सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे करती है, लेकिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं और जल निकासी तक नहीं है। यह शिक्षा व्यवस्था की बदहाली नहीं तो और क्या है?’

वहीं दूसरे यूजर ने लिखा – ‘पिछले साल जिन भवनों को जमीदोंज किया, अभी तक उनके बनाने के बारे में कोई योजना नहीं है न बजट की स्वीकृति। जबकि शिक्षा मंत्री जी ने उनके विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में बागेश्वर बाबा के लिए करोड़ो रुपये खर्च किये। इतने बजट में तो पूरी विधानसभा के स्कूलों का कायाकल्प हो जाता।

इसी साल गिर चुकी है झालावाड़ के एक स्कूल की छत

इसी साल जुलाई में झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र के पीपलोदी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से 7 छात्रों की मौत हो गई थी। जबकि 17 बच्चे घायल हुए थे। इसके बाद भी कुछ बच्चों के मलबे मे दबे होने की आशंका है।

क्लास के अंदर करीब 60 बच्चे मौजूद थे। इस मामले में स्कूल के सभी 5 शिक्षकों को सस्पेंड किया गया है। जानकारी के मुताबिक बच्चों के बार-बार कहने पर भी कि मलबा गिर रहा है, शिक्षकों ने ध्यान नहीं दिया. इसलिए उनके खिलाफ एक्शन लिया गया है।

बता दें कि स्कूल की छत गिरने से हुए हादसे के बाद इलाके के लोग मदद के लिए पहुंचे। मलबे में दबे बच्चों को लोग निकालने लगे। छत गिरने के बाद मलबे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया हो।

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