कैसे काम करता है NTA का सिस्टम, UGC-CBSE और UPSC से कितनी अलग है व्यवस्था?


पेपर लीक को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार एनटीए को लेकर एक्शन मोड में नजर आ रही है. सरकार एनटीए में बड़े बदलाव के साथ ही अगले एक महीने के अंदर इसके पूरे ढांचे को फिर से तैयार करने की योजना बना रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह बदलाव हाई लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिश के आधार पर किए जा रहे हैं, ताकि परीक्षा प्रणाली को पहले से ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके. इन बदलाव के साथ ही अब एनटीए में साइबर सिक्योरिटी जांच और साइकोमेट्रिक्स जैसे अहम क्षेत्र के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी.

पेपर लीक और इन सभी मामलों के बीच अब एनटीए से यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी परीक्षा एजेंसियों को लेकर भी से तुलना की जाने लगी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि एनटीए का पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और यूजीसी-सीबीएसई और यूपीएससी से इसकी व्यवस्था कितनी अलग है. 

क्या है एनटीए और क्यों बनाई गई है यह एजेंसी? 

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए की स्थापना 2017 में केंद्र ने शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था के रूप में की थी. इसे सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड किया गया है और यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में भी आती है. वहीं एनटीए बनाने का उद्देश्य देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को एक पेशेवर, पारदर्शी और तकनीकी आधारित प्रणाली के जरिए आयोजित करना था. इससे पहले अलग-अलग संस्थाएं अपनी-अपनी परीक्षाएं करती थी, जिससे परीक्षा प्रणाली में एकरूपता की कमी मानी जाती थी. 

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एनटीए किन-किन परीक्षाओं का करता है आयोजन? 

वर्तमान में एनटीए देश की कई प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करता है, जिसमें जेईई मेन, नीट यूजी, सीयूईटी यूजी, सीयूईटी पीजी, यूजीसी नेट, सीएसआईआर यूजीसी नेट, सीएमएटी, जीपीएटी और होटल मैनेजमेंट और दूसरी प्रवेश परीक्षाएं शामिल है. इन्हीं परीक्षाओं के जरिए हर साल लाखों छात्र देशभर के अलग-अलग यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेते हैं. 

एनटीए का सिस्टम कैसे करता है काम? 

अक्सर माना जाता है कि एनटीए का काम सिर्फ परीक्षा आयोजित करना है, लेकिन एजेंसी की जिम्मेदारी इससे कहीं ज्यादा व्यापक है. परीक्षा केंद्रों का चयन, प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था, परीक्षा संचालन, डेटा प्रबंधन, रिजल्ट जारी करना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नई तकनीक का उपयोग भी एनटीए की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा होता है. इसके अलावा परीक्षा केंद्रों का चयन पहले से स्वीकृत सरकारी स्कूलों, सीबीएसई से जुड़े इंस्टीट्यूट और जरूरत पड़ने पर एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त कॉलेज की लिस्ट से किया जाता है. हर साल परीक्षा केंद्रों की सहमति और मानकों की दोबारा समीक्षा भी की जाती है. 

सीबीएसई और यूजीसी नेट से कैसे अलग है एनटीए?

एनटीए बनने से पहले मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी नेशनल एडमिशन परीक्षाएं मुख्य रूप से सीबीएसई आयोजित करता था. वहीं यूजीसी, यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं से जुड़े नियम और पात्रता तय करता था. एनटीए बनने के बाद जिम्मेदारी अलग कर दी गई, अब यूजीसी केवल उच्च शिक्षा से जुड़े नियम और पात्रता तय करता है, जबकि परीक्षा करने की पूरी तकनीक और प्रशासनिक जिम्मेदारी एनटीए के पास है. इसी तरह सीबीएसई अब मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं पर केंद्रित है. वहीं एनटीए बनने के बाद कई परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाया गया. इसके अलावा आवेदन, एडमिट कार्ड और रिजल्ट जैसी ज्यादातर प्रक्रिया भी पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई. एनटीए बनने के पहले इस तरह की कई प्रक्रियाएं ज्यादातर ऑफलाइन होती थी. 

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एनटीए और यूपीएससी में क्या है अंतर? 

पेपर लीक विवादों के बाद एनटीए की तुलना यूपीएससी से भी की जा रही है, क्योंकि दोनों राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा आयोजित करते हैं. हालांकि दोनों संस्थाओं की संरचना और कार्य प्रणाली में बहुत अंतर है. यूपीएससी संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित एक संवैधानिक संस्था है, जबकि एनटीए सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत बनी एक स्वायत्त संस्था है. वहीं यूपीएससी के पास अपना स्थायी प्रशासनिक ढांचा और लंबे समय से विकसित गोपनीय परीक्षा प्रणाली है, जबकि एनटीए में बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रतिनिधि नियुक्ति, संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से काम करते हैं. इसके अलावा यूपीएससी की मुख्य परीक्षा सब्जेक्टिव होती है, जबकि एनटीए की ज्यादातर परीक्षाएं ऑब्जेक्टिव और ओएमआर या कंप्यूटर आधारित होती है.

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