NEET UG 2026 AIR 2 Panshul Bansal: एग्जाम रद्द होने पर 2 घंटे तक रोते रहे पंशुल बंसल, फिर की ऐसी वापसी कि बन गए AIR-2


NEET UG 2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल करने वाले दिल्ली के पंशुल बंसल ने अपनी मेहनत और हौसले से लाखों छात्रों के लिए मिसाल पेश की है. बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले पंशुल ने इस साल अपने पहले ही प्रयास में देशभर में दूसरी रैंक हासिल की. एबीपी न्यूज से खास बातचीत में उन्होंने अपनी तैयारी, परीक्षा के दौरान आई मुश्किलों और सफलता के पीछे की कहानी साझा की.

बचपन से ही देखा था यह सपना

पंशुल ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना उन्होंने बचपन में ही देख लिया था. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पढ़ाई की शुरुआत मजबूत आधार बनाने से की. उनका कहना है कि किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए बुनियादी तैयारी सबसे ज्यादा मायने रखती है.

8वीं से ही शुरू कर दी थी तैयारी

उन्होंने बताया कि गणित और विज्ञान की मजबूत नींव रखने के लिए उन्होंने 8वीं कक्षा से ही नियमित और गंभीर पढ़ाई शुरू कर दी थी. इसके बाद 10वीं कक्षा से उन्होंने पूरी तरह NEET की तैयारी पर फोकस कर दिया. इसी साल उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा भी दी और उसके साथ-साथ NEET की तैयारी जारी रखी.

जब दो घंटे तक रोते रहे थे पंशुल

हालांकि, इस सफर में एक ऐसा पल भी आया, जिसने उन्हें पूरी तरह झकझोर दिया. पंशुल ने बताया कि जब NEET UG 2026 की पहली परीक्षा रद्द होने की खबर मिली तो वह खुद को संभाल नहीं पाए. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा था और वह करीब दो घंटे तक लगातार रोते रहे. उन्हें लग रहा था कि उनकी कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने खुद को संभाला. उन्होंने तय किया कि निराश होकर बैठने से कुछ नहीं होगा. इसके बाद उन्होंने पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ दोबारा तैयारी शुरू की. अगर उस समय वह हार मान लेते तो शायद आज यह सफलता नहीं मिलती. उन्होंने दोबारा पूरे मन से पढ़ाई की और अपनी कमजोरियों पर काम किया.

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परिवार को दिया पूरा श्रेय

पंशुल ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर अपने पिता को दिया. उन्होंने कहा कि उनके पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. जब भी पढ़ाई के दौरान तनाव महसूस होता था या आत्मविश्वास कम होता था, तब परिवार ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. 

कैसे रहे थे एग्जाम?

परीक्षा के बारे में पंशुल ने बताया कि इस बार फिजिक्स का पेपर काफी लंबा था. कई छात्रों को समय की कमी महसूस हुई, लेकिन उन्होंने नियमित अभ्यास और बेहतर टाइम मैनेजमेंट की वजह से पूरे पेपर को समय पर पूरा कर लिया. उनका मानना है कि केवल पढ़ाई करना ही काफी नहीं होता, बल्कि परीक्षा के दौरान समय का सही इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है. तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना नियमित पढ़ाई की और किसी भी विषय को लंबे समय तक अधूरा नहीं छोड़ा. जहां भी कमजोरी महसूस हुई, वहां अतिरिक्त समय देकर उसे बेहतर बनाया. 

दूसरे स्टूडेंट्स को दी यह सीख

पंशुल ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए धैर्य, मेहनत और सकारात्मक सोच सबसे जरूरी होती है. अगर कभी असफलता मिले या परिस्थितियां आपके खिलाफ हो जाएं, तब भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई बार मुश्किलें हमें और बेहतर बनने का मौका देती हैं. अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है.

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