Study Abroad Trends: स्टडी अब्रॉड का नया ट्रेंड! विदेश पढ़ने गए भारतीय क्यों लौट रहे जल्दी? एक्सपर्ट ने बताई वजह


Study Abroad Trends : विदेश में पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों का बड़ा सपना रहा है. बेहतर शिक्षा, अच्छी नौकरी और अंतरराष्ट्रीय एक्सपीरियंस के लिए हर साल लाखों छात्र दूसरे देशों का रुख करते हैं. हालांकि अब यह ट्रेंड धीरे-धीरे बदलता नजर आ रहा है. हाल के सालों में न सिर्फ विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में कमी आई है, बल्कि कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले की तुलना में जल्दी भारत लौट रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह बढ़ता खर्च, सख्त इमिग्रेशन नियम, बदलता जॉब मार्केट और भारत में बढ़ते करियर के अवसर जैसे कई कारण हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर भारतीय छात्र अब पहले से जल्दी भारत क्यों लौट रहे हैं.

विदेश पढ़ने का नजरिया क्यों बदल रहा है?

MSM Unify के संस्थापक और निदेशक संजय लॉल के अनुसार, विदेश में पढ़ाई को लेकर छात्रों की सोच पहले जैसी नहीं रही है. पहले अंतरराष्ट्रीय शिक्षा को स्थायी रूप से विदेश में बसने का रास्ता माना जाता था, लेकिन अब छात्र ज्यादा व्यावहारिक तरीके से फैसले ले रहे हैं. उनका कहना है कि आज के छात्र अपने करियर और फ्यूचर को ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं. अगर उन्हें भारत में बेहतर अवसर दिखाई देते हैं, तो वे जल्दी वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं.

विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट

शिक्षा मंत्रालय की ओर से संसद में पेश ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या पिछले कुछ सालों में कम हुई है. साल 2023 में 9.08 लाख से ज्यादा छात्र विदेश पढ़ने गए थे. यह संख्या 2024 में घटकर 7.7 लाख रह गई. वहीं 2025 में यह और घटकर 6.26 लाख पहुंच गई. दो साल के अंदर विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में करीब 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

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विदेश पढ़ने गए भारतीय छात्र क्यों लौट रहे जल्दी?

संजय लॉल के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इमिग्रेशन नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं. वीजा मिलने में ज्यादा समय लग रहा है और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी मिलने की स्थिति भी पहले जैसी आसान नहीं रही. खासकर एआई आधारित बदलावों के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद करियर को लेकर कंफ्यूजन बढ़ा है. 

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एक्सपर्ट ने बताई ये बड़ी वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में पढ़ाई की फीस लगातार बढ़ रही है. इसके साथ रहने का खर्च भी पहले से ज्यादा हो गया है. वहीं रुपये की कीमत में गिरावट के कारण विदेश में पढ़ाई और महंगी पड़ रही है. कई देशों में पढ़ाई शुरू करने से पहले फंड का प्रमाण दिखाने की राशि भी काफी बढ़ा दी गई है. ऐसे में खासकर मिडिल क्लास परिवार अब विदेश में पढ़ाई पर होने वाले खर्च और उसके बदले मिलने वाले फायदा का पहले से ज्यादा सावधानी से आकलन कर रहे हैं.

भारत में बढ़ रहे हैं बेहतर करियर के अवसर 

संजय लॉल के अनुसार, भारत का जॉब मार्केट भी तेजी से बदल रहा है. देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNC), एआई आधारित कंपनियां और स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए अच्छी सैलरी वाली नौकरियों के अवसर बढ़े हैं. यही वजह है कि कई छात्र विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए जल्दी भारत लौटना पसंद कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की अहमियत कम होने का संकेत नहीं है. बल्कि छात्रों की सोच बदल रही है. 

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