Foreign University Campuses in India: गिफ्ट सिटी के बाद अब इन शहरों में खुलने जा रहे हैं इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस, देखें पूरी लिस्ट


Foreign University Campuses in India: विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करना हर छात्र का सपना होता है, लेकिन भारी फीस और विदेश में रहने का खर्च इस सपने को कई बार मुश्किल बना देता है. लेकिन अब छात्रों के लिए बड़ी और अच्छी अपडेट सामने आई है. दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटियां भारत में अपने कैंपस शुरू करने जा रही हैं. जिससे आने वाले समय में विदेश जाकर पढ़ाई करने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है. गिफ्ट सिटी के बाद अब कई बड़े शहरों में इंटरनेशनल कॉलेज कैंपस के नए केंद्र बनने वाले हैं. इससे छात्रों को भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई, इंटरनेशनल डिग्री और ग्लोबल फैकल्टी का फायदा मिलने का मौका मिलेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि गिफ्ट सिटी के बाद अब किन शहरों में इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं. 

भारत में खुलेंगे 15 इंटरनेशनल कॉलेज कैंपस

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 15 इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने स्वतंत्र कैंपस खोलने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया जा चुका है. इनमें से ज्यादातर कॉलेज इसी साल अगस्त से अपने पहले बैच की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी में हैं. शुरुआत में हर कैंपस में करीब 200 से 250 छात्रों को एंट्री दी जाएगी. अगले पांच सालों में यह संख्या बढ़ाकर हर साल 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. बताया जा रहा है कि मौजूदा एडमिशन प्रक्रिया में ही 10 हजार से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं.

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भारत में कैंपस खोलने वाली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटियों की पूरी लिस्ट

भारत में कैंपस स्थापित करने की तैयारी कर रही प्रमुख इंटरनेशनल यूनिवर्सिटिज में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन (यूके), डीकिन यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग (ऑस्ट्रेलिया), क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क (यूके),यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन (यूके), इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका), वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), विक्टोरिया यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया), कोवेंट्री यूनिवर्सिटी (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ सरे (यूके), ला ट्रोब यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) और लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी (यूके) शामिल हैं. 

किन शहरों में इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं?

भारत में इंटरनेशनल कॉलेजों के नए कैंपस चार प्रमुख शहरों में स्थापित किए जा रहे हैं. जिसमें दिल्ली-एनसीआर (गुरुग्राम) में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी अपने कैंपस शुरू करेंगी. गिफ्ट सिटी में डीकिन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग और क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट अपने कैंपस स्थापित कर रही हैं. वहीं बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल अपना कैंपस खोलेगी. इसके अलावा मुंबई में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस खुलने जा रहे हैं. यहां चार इंटरनेशनल कॉलेजों के कैंपस स्थापित किए जा रहे हैं. मुंबई में यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल, यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अपने कैंपस शुरू करने की तैयारी में हैं. इन शहरों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों से जुड़ाव और बड़े छात्र आधार की वजह से चुना गया है.

एडमिशन के लिए क्या होगी योग्यता?

ज्यादातर इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज में एंट्री के लिए छात्रों के पास 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत नंबर होने चाहिए. वहीं पोस्टग्रेजुएट कोर्स के लिए 55 से 70 प्रतिशत नंबर जरूरी हो सकते हैं. यह प्रतिशत कोर्स और यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.अगर किसी छात्र के बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 70 से 85 प्रतिशत नंबर हैं, तो कई यूनिवर्सिटीज में IELTS स्कोर की जरूरत नहीं होगी.

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किन विषयों में होगी पढ़ाई?

शुरुआत में इन यूनिवर्सिटीज का फोकस मुख्य रूप से मॉर्डन और रोजगार आधारित कोर्सों पर रहेगा. इनमें प्रमुख रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटर साइंस, STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) जैसे विषय शामिल होंगे. इन यूनिवर्सिटीज का सिलेबस, परीक्षा प्रणाली और ग्रेडिंग उनके मूल इंटरनेशनल कैंपस के अनुसार ही होगी. 

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विदेश में पढ़ाई का भी मिलेगा मौका

इन यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्रों को एक या दो सेमेस्टर विदेश में पढ़ाई करने का अवसर भी मिलेगा. यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क 2+1 मॉडल शुरू करेगी, जिसमें छात्र दो साल मुंबई कैंपस और एक साल यूके में पढ़ सकेंगे.यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के भारत कैंपस के छात्रों को क्लाउड सिस्टम के जरिए यूके में मौजूद यूनिवर्सिटी की AI सुपर कंप्यूटिंग सुविधा का यूज  करने का अवसर मिलेगा.

फैकल्टी और स्कॉलरशिप की क्या होगी व्यवस्था?

इन कैंपस में भारतीय टीचर्स के साथ-साथ विदेश से आने वाले प्रोफेसर भी पढ़ाएंगे.स्टूडेंट्स के लिए मेरिट और आर्थिक स्थिति के आधार पर स्कॉलरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी. अगले पांच सालों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का संयुक्त स्कॉलरशिप फंड तय किया गया है. छात्रों को 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक फीस में छूट मिल सकती है. इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन और यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल जैसी संस्थाओं ने भी अलग से स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है. भारत में इन कैंपस के खुलने से छात्रों को विदेश जैसी शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय डिग्री, वैश्विक फैकल्टी और रिसर्च सुविधाएं यहीं मिल सकेंगी. साथ ही विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत कम खर्च आएगा.

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