दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. योगेश सिंह को फिर मिला मौका, लगातार दूसरी बार संभालेंगे VC की जिम्मेदारी


दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के इतिहास में पहली बार किसी कुलपति को लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रो. योगेश सिंह को अगले पांच साल के लिए फिर से दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है.उनका नया कार्यकाल 8 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा. माना जा रहा है कि पिछले कार्यकाल में शिक्षा और प्रशासन से जुड़े कई बड़े फैसलों की वजह से उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी गई है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में अब तक किसी भी कुलपति को लगातार दूसरी बार नियुक्त नहीं किया गया था.कुछ साल पहले विश्वविद्यालय के नियमों में बदलाव किया गया था, जिसके बाद कुलपति को दूसरा कार्यकाल देने का रास्ता खुला. इसी नियम के तहत प्रो. योगेश सिंह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले कुलपति बन गए हैं. यह फैसला DU के इतिहास में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है.

2021 में संभाली थी कुलपति की जिम्मेदारी

प्रो. योगेश सिंह ने 8 अक्टूबर 2021 को दिल्ली विश्वविद्यालय के 23वें कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला था. पिछले पांच वर्षों में उन्होंने विश्वविद्यालय में कई बड़े बदलावों की शुरुआत की. शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने, छात्रों के लिए नई सुविधाएं शुरू करने और प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए गए.

नई शिक्षा नीति को तेजी से किया लागू

उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करना शामिल है.इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) शुरू किया गया. इसके साथ ही छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट जैसी नई सुविधाएं भी मिलने लगीं. इस बदलाव का उद्देश्य पढ़ाई को अधिक लचीला और रोजगार के लिहाज से बेहतर बनाना था.

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CUET से आसान और पारदर्शी हुई एडमिशन प्रक्रिया

पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला बोर्ड परीक्षा के अंकों और कटऑफ के आधार पर होता था. लेकिन प्रो. योगेश सिंह के कार्यकाल में प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया और CUET के जरिए एडमिशन शुरू हुआ. इससे देशभर के छात्रों को समान अवसर मिलने लगे और दाखिला प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी बनी.

पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय ने डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर भी खास ध्यान दिया. परीक्षा प्रणाली को डिजिटल बनाया गया, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट लागू किया गया और छात्रों के लिए कई ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की गईं.इसके साथ ही कैंपस के विकास और नई इमारतों समेत कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर भी तेजी से काम हुआ.

शिक्षकों की भर्ती को मिली रफ्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की दिशा में भी तेजी से काम किया गया. कई कॉलेजों और विभागों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियां शुरू हुईं, जिससे पढ़ाई और शोध कार्य को मजबूती मिली. इसका फायदा छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल के रूप में मिला.

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शिक्षा और प्रशासन दोनों में है लंबा अनुभव

प्रो. योगेश सिंह का शिक्षा और प्रशासन दोनों क्षेत्रों में लंबा अनुभव रहा है. दिल्ली विश्वविद्यालय आने से पहले वे दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के वाइस चांसलर रह चुके हैं.इसके अलावा उन्होंने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (पूर्व NSIT) के निदेशक और महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, बड़ौदा के कुलपति के रूप में भी काम किया है. फिलहाल उनके पास AICTE के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी है.

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दूसरे कार्यकाल से बढ़ीं उम्मीदें

लगातार दूसरी बार कुलपति बनने के बाद अब छात्रों और शिक्षकों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय रिसर्च, डिजिटल शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक सुविधाओं और रोजगार आधारित शिक्षा पर और ज्यादा ध्यान देगा.साथ ही नई शिक्षा नीति को और प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में भी काम जारी रहेगा.

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