TRE-3 शिक्षक भर्ती: 18 महीने का NIOS D.El.Ed करने वालों की छिनेगी जॉब, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश


बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख चुके और नौकरी पा चुके हजारों अभ्यर्थियों के लिए बुरी खबर सामने आ रही है. राज्य में तीसरे चरण की शिक्षक नियुक्ति (TRE-3) के तहत सरकारी स्कूलों में बहाल हुए उन शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का फैसला किया गया है, जिन्होंने NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) से 18 महीने का डीईएलएड (D.El.Ed) कोर्स किया था. शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEOs) को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया है. सरकार के इस फैसले से उन शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, जो इस योग्यता के आधार पर स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे थे.

प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों को भेजा पत्र

यह कार्रवाई राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी किए गए एक पत्र के बाद शुरू हुई. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजे गए इस पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि साल 2024 में आयोजित TRE-3 भर्ती के तहत जितने भी शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनके दस्तावेजों की दोबारा जांच की जाए. जांच के दौरान कोई भी ऐसा शिक्षक पाया जाता है, जिसने NIOS से केवल 18 महीने का D.El.Ed कोर्स करके यह नौकरी हासिल की है तो उसकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाए.

विज्ञापन की शर्तों का दिया गया हवाला

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में भर्ती के नियमों और विज्ञापनों का हवाला दिया है. पत्र में लिखा है कि विज्ञापन संख्या-22/2024 (TRE-3) की कंडिका-2 बी (फोर) में साफ-साफ लिखा था कि शिक्षा विभाग के 7 दिसंबर, 2023 को जारी आदेश के अनुसार, NIOS द्वारा दिया गया 18 महीने का डीईएलएड कोर्स विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए मान्य नहीं माना जाएगा. विज्ञापन में यह शर्त पहले से ही जोड़ी गई थी, इसलिए विभाग अब इन नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

See also  Education Ministry orders probe into NEET-UG leak row, seeks report on COEMPT contract award

कैसे समाप्त होगी शिक्षकों की सेवा? 

शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को केवल आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है. 

  • शिक्षकों की पहचान: सबसे पहले सभी जिलों के शिक्षा अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच करेंगे और NIOS से 18 महीने का कोर्स करने वालों की लिस्ट बनाएंगे.
  • निर्धारित कानूनी प्रक्रिया: इन शिक्षकों को सीधे हटाने के बजाय तय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाया जाएगा, ताकि बाद में कोई कानूनी अड़चन न आए.
  • तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश: कार्रवाई पूरी करने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इसकी पूरी रिपोर्ट शिक्षा विभाग के मुख्यालय को सौंपनी होगी.

कितने शिक्षकों पर गिरेगी गाज?

इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिहार में ऐसे कितने शिक्षक हैं, जिनकी नौकरी अब खतरे में है? इसका जवाब शिक्षा विभाग के पास भी नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों से रिपोर्ट मंगवाई जा रही है. जब सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने जिलों की जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप देंगे, उसके बाद ही सटीक डेटा मिल पाएगा. बता दें कि यह आदेश रातों-रात नहीं आया, बल्कि इसकी प्रक्रिया पहले से चल रही थी. तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर के हस्ताक्षर से यह आदेश 22 जून को ही जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जारी कर दिया गया था, जिस पर अब अमल किया जा रहा है.

ये भी पढ़ें: खास दुकान से किताबें-यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव नहीं डाल पाएंगे स्कूल, शिकायत पर तुरंत होगा एक्शन

See also  TS SSC Results 2026 Live, Telangana Class 10 result link, websites | Education and Career News

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave A Comment

All fields marked with an asterisk (*) are required