Madrasa Education in India: शेख उल हिंद से फज्ले हक खैराबादी और एपीजे अब्दुल कलाम तक, मदरसे से पढ़ी हैं देश की ये हस्तियां


Madrasa Education in India : भारत में मदरसों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है. बताया जाता है कि देश के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन, समाज सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में मदरसों से जुड़े कई लोगों ने जरूरी योगदान दिया है. मदरसों में शिक्षा पाने वालों में शेख उल हिंद से फज्ले हक खैराबादी और एपीजे अब्दुल कलाम तक कई हस्तियों के नाम भी लिए जाते हैं. इसके अलावा कई ऐसे विद्वान और शिक्षाविद रहे, जिन्होंने देश और समाज के लिए बड़े काम किए. ऐसे में आइए उन हस्तियों के बारे में जानते हैं, जिनका नाम मदरसों की शिक्षा और परंपरा से जुड़ा रहा है. 

मदरसे से पढ़ी हैं देश की ये हस्तियां

1. अल्लामा फजले हक खैराबादी – अल्लामा फजले हक खैराबादी को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने इस्लामी धर्मशास्त्र और दर्शन की शिक्षा मदरसों से प्राप्त की थी. खैराबादी केवल एक धार्मिक विद्वान ही नहीं थे, बल्कि दिल्ली के मुख्य न्यायाधीश के पद पर भी रहे. अंग्रेजी शासन के खिलाफ उन्होंने जिहाद का फतवा जारी किया था. इसी कारण उन्हें गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और अंडमान के काला पानी भेज दिया गया. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान आज भी जरूरी माना जाता है.

2. शेख उल हिंद मौलाना  – मौलाना महमूद-उल-हसन देवबंद स्थित दारुल उलूम के पहले छात्रों में शामिल थे. उन्होंने लगभग 44 सालों तक दारुल उलूम देवबंद में अध्यापन कार्य किया और हजारों छात्रों को शिक्षा दी.  ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए आंदोलन चलाया. अंग्रेजों के खिलाफ उनकी गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार कर माल्टा की जेल में कैद किया गया, जहां उन्होंने करीब तीन साल बिताए. मौलाना महमूद-उल-हसन को बाद में शेख-उल-हिंद की उपाधि से सम्मानित किया गया. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने मुस्लिम समाज में कुरान की शिक्षा के प्रसार और आपसी एकता पर विशेष जोर दिया. उनका मानना था कि मुसलमानों के पिछड़ने के दो प्रमुख कारण कुरान से दूरी और आपसी मतभेद हैं. 

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3. राजा राम मोहन राय – भारतीय समाज सुधार आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल राजा राम मोहन राय का नाम भी उन लोगों में लिया जाता है जिन्होंने मदरसों में शिक्षा प्राप्त की थी. राजा राम मोहन राय ने भारतीय समाज में फैली कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और आधुनिक विचारधारा को बढ़ावा दिया, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है. 

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4. मुंशी प्रेमचंद – हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित लेखकों में गिने जाने वाले मुंशी प्रेमचंद का नाम भी मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने वाली हस्तियों में शामिल है. प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत की, किसानों, मजदूरों और आम लोगों के जीवन को उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में प्रमुखता से स्थान दिया. उनकी रचनाएं आज भी भारतीय साहित्य की धरोहर मानी जाती हैं. 

5. डॉ. राजेंद्र प्रसाद – भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी उन प्रमुख हस्तियों में गिने जाते हैं जिनका नाम मदरसा शिक्षा से जुड़ा रहा है. स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनकी जरूरी भूमिका रही. संविधान निर्माण की प्रक्रिया से लेकर राष्ट्रपति पद तक, उन्होंने देश को नई दिशा देने का कार्य किया. 

6. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम – भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन आधुनिक भारत की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक माना जाता है. 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे डॉ. कलाम ने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) के विकास में जरूरी भूमिका निभाई.इसके बाद उन्होंने इसरो और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में कई जरूरी परियोजनाओं का नेतृत्व किया. अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों के विकास से लेकर पोखरण-II परमाणु परीक्षण तक, कई राष्ट्रीय परियोजनाओं में उनका योगदान रहा. 

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