NCERT की नई किताब में बदली दिखी सिंधु घाटी सभ्यता की ‘डांसिंग गर्ल’, तस्वीर पर छिड़ी बहस


राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा की बदली हुई तस्वीर को लेकर इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा शुरू हो गई है. यह प्रतिमा भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्रसिद्ध पुरातात्विक खोजों में से एक मानी जाती है और हजारों वर्षों पुरानी कला विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है.

यह तस्वीर NCERT की नई कला शिक्षा पुस्तक ‘मधुरिमा’ में प्रकाशित की गई है. पुस्तक के पहले अध्याय ‘कला का इतिहास’ में शामिल इस चित्र में प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा का स्वरूप मूल प्रतिमा से कुछ अलग दिखाई देता है. विशेष रूप से प्रतिमा के ऊपरी हिस्से में बदलाव देखने को मिला है, जिसने विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है.

क्या है ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा?

दरअसल, सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो से मिली ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा लगभग 4,000 वर्ष पुरानी मानी जाती है. यह कांस्य से निर्मित एक छोटी मूर्ति है, जो अपनी कलात्मकता, आत्मविश्वास से भरी मुद्रा और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. इतिहास और पुरातत्व से जुड़ी पुस्तकों में इसे अक्सर उसी मूल स्वरूप में प्रकाशित किया जाता है, जिसमें यह खोजी गई थी.

हालांकि NCERT की नई पुस्तक में प्रकाशित तस्वीर में प्रतिमा के धड़ (टॉर्सो) वाले हिस्से को छायांकित या ढका हुआ दिखाया गया है. मूल प्रतिमा में दिखाई देने वाले शारीरिक विवरण इस तस्वीर में नजर नहीं आते. इसके कारण प्रतिमा को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो वह कोई परिधान पहने हुए हो.

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क्या बोले NCERT के डायरेक्टर?

इस बदलाव के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और शैक्षणिक जगत में इस पर चर्चा शुरू हो गई है. कई इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को उनके मूल स्वरूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों को सही और प्रामाणिक जानकारी मिल सके. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि यह केवल एक कलात्मक प्रस्तुति हो सकती है और इसे किसी बड़े विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

मामले में NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी का कहना है कि प्रतिमा के धड़ को ढकने के पीछे कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है. उन्होंने कहा कि इस विषय को कला एवं शिक्षा विभाग के पास भेजा गया है, जो इस पुस्तक के निर्माण के लिए जिम्मेदार है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अधिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक विकास टीम से संपर्क किया जा सकता है.

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प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक

NCERT की ओर से अभी तक इस बदलाव को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर में किया गया परिवर्तन तकनीकी कारणों से हुआ या फिर यह पुस्तक की डिजाइन प्रक्रिया का हिस्सा था.

‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजों में गिनी जाती है. 1920 के दशक में मोहनजोदड़ो से मिली यह प्रतिमा सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत कला और धातु शिल्प तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है. आज भी यह प्रतिमा भारत और दक्षिण एशिया की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है.

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