RBI क्यों जारी करता है Star Mark वाले नोट? जानिए इसके पीछे की वजह


क्या आपने कभी सोचा है कि नोटों की छपाई के दौरान अगर कोई गलती हो जाए तो उन नोटों का क्या होता है? कई बार सोशल मीडिया पर गलत छपे हुए नोटों की तस्वीरें वायरल होती हैं, जिन्हें देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे नोट बाजार में चल सकते हैं या फिर उनकी कोई खास कीमत होती है. आइए जानते हैं…

भारत में नोटों की छपाई एक बेहद सुरक्षित और तकनीकी प्रक्रिया के तहत की जाती है. नोट छापने के दौरान हर चरण पर गुणवत्ता की जांच की जाती है ताकि कोई भी त्रुटिपूर्ण नोट आम लोगों तक न पहुंचे. इसके बावजूद यदि किसी नोट में प्रिंटिंग से जुड़ी कोई गलती हो जाती है, तो उसे तुरंत अलग कर लिया जाता है.

रिपोर्ट्स के अनुसार नोटों पर नंबर छापने से पहले और बाद में उनकी कई स्तरों पर जांच होती है. इस दौरान प्रिंटिंग सुपरवाइजर और विशेषज्ञ टीम यह सुनिश्चित करती है कि नोट का रंग, डिजाइन, आकार, सुरक्षा फीचर और नंबरिंग पूरी तरह सही हो. यदि कोई नोट धुंधला छपा हो, उल्टा प्रिंट हो गया हो, कटिंग में गड़बड़ी हो या किसी अन्य प्रकार की गलती हो, तो उसे डिफेक्टिव नोट मानकर अलग कर दिया जाता है.

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बाजार में नहीं आते हैं ऐसे नोट  

ऐसे सभी खराब या मिस-प्रिंट नोटों को बाजार में जारी नहीं किया जाता. इन्हें सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच नष्ट कर दिया जाता है. आमतौर पर इन नोटों को मशीनों की मदद से काटकर, टुकड़ों में बदलकर या विशेष प्रक्रिया के जरिए नष्ट किया जाता है, ताकि उनका किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो सके.

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क्या है स्टार मार्क के पीछे की वजह?

मिस-प्रिंट नोटों से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू ‘स्टार सीरीज’ नोट भी है. जब किसी नोट के बंडल में कोई खराब नोट पाया जाता है और उसे हटाना पड़ता है, तो उसकी जगह एक नया नोट डाला जाता है. इस नए नोट के नंबर के बीच में एक स्टार (*) का निशान होता है. इसी वजह से इसे स्टार सीरीज नोट कहा जाता है.

कई लोग स्टार मार्क वाले नोट को देखकर भ्रमित हो जाते हैं और उसे नकली या विशेष नोट समझ लेते हैं. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार स्टार मार्क वाला नोट पूरी तरह असली और वैध होता है. इसका उपयोग सामान्य नोट की तरह ही किया जा सकता है. यह केवल इस बात का संकेत होता है कि इसे किसी खराब नोट के स्थान पर जारी किया गया है.

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